(a) चिकित्सा हितलाभ : बीमाकृत व्यक्ति और उसके परिजनों को बीमा योग्य रोजगार में आने के दिन से पूर्ण चिकित्सा देखरेख प्रदान की जाती है। एक बीमाकृत व्यक्ति और उसके परिजनों के उपचार पर व्यय की कोई अधिकतम सीमा नहीं है । सेवा निवृत्त और स्थायी अपंग बीमाकृत व्यक्तियों और उसके पति/पत्नी को रुपये 120/- के सांकेतिक वार्षिक प्रीमियम पर चिकित्सा देखरेख प्रदान की जाती है ।
- उपचार की प्रणाली
- चिकित्सा हितलाभ का पैमाना
- सेवानिवृत्त बीमाकृत व्यक्तियों को हितलाभ
- राज्य में चिकित्सा हितलाभ का प्रशासन
- अधिवासीय/ गृह उपचार
- विशेषज्ञ परामर्श
- भर्ती रोगी उपचार
- प्रतिछाया सेवाएँ
- कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण
- विशेष व्यवस्थाएं
- प्रतिपूर्ति
- विस्तारित बीमारी हितलाभ : 34 घातक और दीर्घकालीन बीमारियों के मामले में मजदूरी के 80% की बढ़ी दर से उसे 2 वर्षों तक विस्तारित किया जा सकता है ।
- वर्धित बीमारी हितलाभ : इसके अलावा बीमाकृत व्यक्तियों द्वारा बंध्यकरण कराने पर वर्धित बीमारी हितलाभ पुरुष और महिला कामगारों को क्रमशः 7 दिन/14 दिन के लिए पूर्ण मजदूरी के बराबर देय होगा
(d) अपंगता हितलाभ
- अस्थायी अपंगता हितलाभ : अस्थायी अपंगता हितलाभ जब तक अपंगता रहती है अस्थायी अपंगता हितलाभ मजदूरी के 90% की दर से अदा किया जाता है ।
- स्थायी अपंगता हितलाभ : चिकित्सा बोर्ड द्वारा प्रमाणित अर्जन क्षमता की हानि की सीमा पर निर्भर यह हितलाभ मासिक भुगतान के रूप में मजदूरी के 90% की दर से अदा किया जाता है ।
(f) अन्य हितलाभ :
अंत्येष्टि व्यय : बीमाकृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने के लिए संबंधियों को रुपये 10,000/- तक भुगतान करना ।
प्रसूति व्यय : किसी बीमाकृत महिला या बीमाकृत व्यक्ति को उसकी पत्नी की प्रसूति उस स्थान पर होने के मामले में जहाँ क॰ रा॰ बी॰ योजना के अंतर्गत आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अतिरिक्त, यह योज़ना कुछ अन्य आवश्यकता आधारित हितलाभ भी बीमाकृत कामगारों को उपलब्ध करवाये जाते हैं।
व्यावसायिक पुनर्गठन :व्यावसायिक पुनर्वास केन्द्र में व्यावसायिक पुनर्वास प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे स्थायी अपंगता बीमाकृत व्यक्ति को ।
पुनर्वास भत्ता : बीमाकृत व्यक्तियों के शारीरिक निःशक्तता की स्थिति में
वृद्धावस्था चिकित्सा देखरेख :बीमाकृत व्यक्ति के अधिवर्षिता पर सेवा निवृत्त होने या स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति/ई आर एस के अंतर्गत स्थायी अपंगता के कारण नौकरी छोड़ने पर रुपये 120/- वार्षिक के भुगतान पर बीमाकृत व्यक्ति और उसके विवाहिती को ।
राजीव गाँधी श्रमिक कल्याण योजना :बेरोजगार भत्ता की यह योजना 01.04.2005 में आरम्भ की गई थी । तीन या अधिक वर्षों तक बीमित रहने के बाद जो बीमाकृत व्यक्ति कारखाने/संस्थान के बंद होने, छंटनी होने या स्थायी अशक्तता के कारण बेरोजगार हो जाता है वे पात्र होंगे कि:-
- एक वर्ष तक की अधिकतम अवधि के लिए मजदूरी के 50% के बराबर बेरोजगार भत्ता ।
- बीमाकृत व्यक्ति के बेरोजगार भत्ता प्राप्त करने की अवधि तक स्वयं और उसके परिवार के लिए क.रा.बी. अस्पतालों/औषधालयों से चिकित्सा देखरेख ।
- कुशलता बढ़ाने के लिए प्रदत्त व्यावसायिक प्रशिक्षण पर व्यय का क.रा.बी.निगम द्वारा वहन शुल्क/यात्रा भत्ता ।
- शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए ईएसआईसी का लाभ उठाने हेतु न्यूनतम आय सीमा - रूपये 25000/- ।
- नियोक्ताओं के अंशदान को भारत सरकार द्वारा 3 वर्षों तक वहन किया जाएगा ।
नकद हितलाभ, निगम द्वारा सीधे, कुछ अंशदायी शर्तों के अधीन अपने शाखा कार्यालयों / भुगतान कार्यालयों के माध्यम से संवितरित किए जाते हैं।


