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व्याप्ति
 

कारखानों की व्याप्ति क.रा.बी.अधिनियम 1948 के अर्न्तगत व्याप्ति:-

कर्मचारियों की व्याप्ति

कार्यान्वित क्षेत्र अधिनियम प्रारम्भ में शक्ति का प्रयोग करने वाले और 20 या अधिक व्यक्तियों को नियोजित करने वाले गैर-मौसमी कारखानों पर लागू होता था लेकिन अब यह शक्ति का प्रयोग करने वाले और मजदूरी पर 10 या इससे अधिक व्यक्तियों को नियोजित करने वाले और शक्ति का प्रयोग न करने वाले 20 या इससे अधिक व्यक्तियों को नियोजित करने वाले गैर-मौसमी कारखानों पर भी लागू होता है ।

अधिनियम की धारा 1(5) के अन्तर्गत योजना का 20 या योजित करने वाली दुकानों, होटलों, रेस्तरां, पूर्व-दर्शन थिएटर सहित सिनेमाघर, सड़क-मोटर, परिवहन उपक्रमों तथा समाचार पत्र स्थापनाओं पर विस्तार किया गया है ।

अधिनियम के अंतर्गत व्याप्ति के लिए मौजूदा मजदूरी सीमा 10000/-रुपये प्रतिमाह है (1.10.2006 से लागू)

व्याप्त क्षेत्र

क.रा.बी.योजना चरणबद्व रूप से क्षेत्रवार लागू की जा रही है । योजना पहले से ही निम्नलिखित राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों के विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त की जा चुकी है ।

राज्य

नागालैंड, मणीपुर, त्रिपुरा, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश तथा मिजोरम को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में योजना लागू है ।

संघ शासित क्षेत्र

दिल्ली, चण्डीगढ़ तथा पांडिचेरी

31-3-2006 की स्थिति के अनुसार व्याप्ति

बीमाकृत व्यक्ति परिवार एककों की संख्या

91,48,605

कर्मचारियों की संख्या

84,00,526

लाभाधिकारियों की कुल संख्या

3,54,96,589

बीमाकृत महिलाओं की संख्या

15,43,250

कारखानों की संख्या

3,00,718

व्याप्ति

कारखानों की व्याप्ति

कर्मचारियों की व्याप्ति

कार्यान्वित क्षेत्र

कर्मचारियों की व्याप्ति

उपर्युक्त कारखानों या स्थापनाओं के कर्मचारियों/कामगारों की व्याप्ति के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा मजदूरी सीमा निर्धारित की जाती है । अधिनियम की धारा 2(9) के अन्तर्गत ‘कर्मचारी’ शब्द इस प्रकार परिभाषित है कि अधिनियम के दायरे में लाए गए किसी कारखाने, मजदूरी के लिए नियोजित व्यक्ति या कारखाने, या स्थापना के कार्य के लिए नियोजित व्यक्ति । व्याप्त मजदूरी सीमा में समय-समय पर बढ़ोतरी की जाती है।

1.10.2006 से लागू मजदूरी सीमा 10000/-रुपये प्रतिमाह है ।

कारखानों की व्याप्ति

कर्मचारियों की व्याप्ति

कार्यान्वित क्षेत्र अधिनियम कार्यान्वित क्षेत्रों में स्थित शक्ति का प्रयोग करने वाले और मजदूरी पर 10 या इससे अधिक व्यक्तियों को नियोजित करने वाले और शक्ति का प्रयोग न करने वाले 20 या इससे अधिक व्यक्तियों को नियोजित करने वाले गैर-मौसमी कारखानों पर लागू होता है । अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार यह अधिनियम औद्योगिक, वाणिज्यिक, कृषि या इसी प्रकार के अन्य संस्थानों को धारा 1(5) के तहत योजना के दायरे में लाया जा सकता है । कई राज्य सरकारों ने 20 या अधिक कर्मचारी नियोजित करने वाले अन्य संस्थानों पर भी अधिनियम के उपबंधों का विस्तार स्थापनाओं की निम्नलिखित श्रेणियों पर भी किया है यथा दुकाने, होटल, रेस्तरां पूर्व-दर्शन थियटर सहित सिनेमा, सड़क परिवहन एजेंसियॉ समाचार पत्र स्थापनाएँ ।

 

जो कारखाना एक बार योजना के दायरे में आ जाता है वह योजना के दायरे में व्याप्त रहता है चाहे बाद में कर्मचारियों की संख्या 10 या 20 से कम ही क्यों न हो जाए या विनिर्माण प्रक्रिया में शक्ति का प्रयोग बंद भी हो जाए । खनन के कार्य पर लगे मजदूरों, रेलवे द्वारा चलाए जा रहे डिपो कुछ ऐसे मौसमी कारखाने जो वर्ष में 7 महीने से कम समय के लिए कार्य करते हैं, इन पर अधिनियम लागू नहीं होता । ऐसे कारखाने या स्थापनाएं जिन्हें राज्य सरकार/केन्द्रीय सरकार चलाती है और उनके कर्मचारी इसी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं या अधिनियम के अन्तर्गत उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा हितलाभों से अच्छी सुंविधाएं प्राप्त कर रहे हैं उन्हे अधिनियम के अन्तर्गत व्याप्ति से छूट प्रदान की जा सकती है ।

 
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