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पंजीकरण

पंजीकरण क्या है ?
पंजीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा प्रत्येक कारखानें/नियोजक और मजदूरी के लिए नियोजित इसके प्रत्येक कर्मचारी को योजना के अधीन लाने के प्रयोजन से चिन्ह्ित किया जाता है और उनके वैयक्तिक रिकार्ड तैयार किए जाते हैं ।

इस प्रक्रिया में सबसे पहले व्याप्ति योग्य कारखाने/दुकान/स्थापना के बारे में ब्योरे प्राप्त किए जाते हैं और क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा उन्हें कूट संख्या का आबंटन करके चिन्ह्ित किया जाता है ताकि नियोजकों द्वारा देय अदा किए गए अंशदान से संबंधित दायित्वों को पूरा करने पर नज़र रखी जा सके । तत्पश्चात क्षेत्रीय कार्यालय/शाखा कार्यालय द्वारा योजना के अधिकार क्षेत्र में लाए गए कारखानों के कर्मचारियों का पंजीकरण करना है जहां पंजीकरण संबंधी कार्य विकेन्द्रित है और उनकी पहचान बीमाकृत संख्या का आबंटन करके की जाती है । पात्रता के अनुसार योजना के अधीन हितलाभों को दर्ज करने के लिए आवश्यक रिकार्ड तैयार किए जाते हैं जिनकी प्राप्ति के लिए बीमाकृत व्यक्ति हकदार होते हैं । ऐसा करने से भविष्य में समय-समय पर प्रत्येक नियोजक/कर्मचारी के रिकार्ड में आवश्यक परिवर्तन करने में सुविधा रहेगी और नियोजकों से अनुपालन करवाना सुगम होगा तथा संबंधित बीमाकृत व्यक्तियों को हितलाभ मुहैया करवाया जा सकेगा ।
नियोजकों का पंजीकरण
1.2 कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम की धारा 2 क इस प्रकार उपबन्धित है :-

2 क. हर कारखाना या स्थापना , जिस पर यह अधिनियम लागू होता है , ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति से जो इस निमित्त बनाए गए , विनियमों में विनिर्दिष्ट की जाए , पंजीकृत किया जायेगा ।

1.3. अधिनियम में इस उपबंध का अनुपालन करने हेतु कर्मचारी राज्य बीमा (साधारण) विनियम ,1950 के विनियम 10 ख अन्त:स्थापित किया गया था । विनियम निम्न प्रकार से उपबंधित है :-

10. ख- कारखानों अथवा स्थापनाओं का पंजीकरण :-

(क) जिस कारखाने या स्थापन को अधिनियम प्रथम बार लागू है और जिसे नियोजक संकेत संख्यांक अभी आबंटित नहीं किया गया है , उससे संबंधित नियोजक और जिस कारखाने या स्थापन को अधिनियम पहले लागू है किन्तु तत्समय लागू नहीं रहा है , उससे संबंधित नियोजक , यथास्थिति , कारखाने या स्थापन को अधिनियम के लागू होने के पश्चात पन्द्रह दिन तक प्ररूप 01 में (जिसे इसमें इसके पश्चात् नियोजक रजिस्ट्रीकरण प्ररूप कहा गया है) रजिस्ट्रीकरण की लिखित घोषणा समुचित प्रादेशिक कार्यालय में देगा ।

(ख) नियोजक उन सभी विशिष्टियों और जानकारी के सही होने के लिए उत्तरदायी होगा जिनकी नियोजक-रजिस्ट्रीकरण प्ररूप के लिए अपेक्षा की गई है और जो उसमें दी गयी है ।

(ग) समुचित प्रादेशिक कार्यालय उस नियोजक को जो इस विनियम के पैरा (क) की अपेक्षाओं का पालन इसमें कथित समय के भीतर करने में असफल रहता है , यह निदेश कर सकेगा कि वह नियोजक-रजिस्ट्रीकरण प्ररूप सम्यक रूप से पूरा करके ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर जो विनिर्दिष्ट किया जाए , उस कार्यालय में दे दे और तब ऐसा नियोजक इस निमित्त उस कार्यालय द्वारा जारी किए गए अनुदेशों का पालन करेगा ।

(घ) सम्पूरित नियोजक रजिस्ट्रीकरण प्ररूप के प्राप्त हो जाने पर यदि समुचित प्रादेशिक कार्यालय का यह समाधान हो जाता है कि कारखाना या स्थापन एक ऐसा कारखाना या स्थापन है जिसे अधिनियम लागू है तो वह (जब तक कि कारखाने या स्थापन को एक नियोजक संकेत संख्यांक पहले से ही आबंटित न कर दिया गया हो) उसे एक नियोजक संकेत संख्यांक आबंटित करेगा और नियोजक को उस संख्यांक की सूचना देगा ।

(ड.) नियोजक , अधिनियम , नियमों और इन विनियमों से संबंधित अपने द्वारा तैयार या संपूरित किए गए सभी दस्तावेजों और समुचित कार्यालय से सभी पत्र-व्यवहार में नियोजक संकेत संख्यांक दर्ज करेगा ।

क॰रा॰ बी॰ अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण के लिए नियोजक अब ऑनलाइन पर आवेदन प्रस्तुत कर सकते है।
http://www.esic.in/